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कोष - अवस्थाएँ (जड़-चैतन्य परमाणु) - Coggle Diagram
कोष - अवस्थाएँ (जड़-चैतन्य परमाणु)
जड़-चैतन्य परमाणु में कोष गठन प्रक्रिया, प्रभाव व चारों अवस्थाएँ
पदार्थावस्था (Material State)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: अंतिम परिवेश [1, 2]
कोष गठन: अन्नमय कोष [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: जड़ परमाणु में अनुभवों की परम्परता में [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना (Action Basis): पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: भौतिक [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: परिणामानुषंगी [1, 2]
प्राणावस्था (Prana/Bio-State)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: अंतिम और अंतिम के पहला परिवेश [1, 2]
कोष गठन: मनोमय कोष, प्राणमय कोष, अन्नमय कोष [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: मनोमय कोष अनुभवों की परम्परता में [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: भौतिक रासायनिक क्रिया [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: बीजानुषंगी [1, 2]
जीवावस्था (Jeeva/Animal State)
3.1. शरीर (Body)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: अंतिम और अंतिम के पहला परिवेश [1, 2]
कोष गठन: अन्नमय कोष, प्राणमय कोष [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: अनुभवों की परम्परता में व शरीर रूप में [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: भौतिक, रासायनिक क्रिया [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: बीजानुषंगी [1, 2]
3.2. जीवन (Consciousness)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: तृतीय पूर्वक अधिक क्रियाशील, द्वितीय अत्यधिक क्रियाशील [1, 2]
कोष गठन: आनंदमय कोष, मनोमय कोष, प्राणमय कोष, अन्नमय कोष (तुप्त) [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: जीवन परमाणु में (संवेदना के आधार पर अनुकूल, प्रतिकूल) [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: मानना, पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: जीवन क्रिया (वंशानुषंगी प्रवृत्ति) [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: वंशानुषंगी (कर्म करते समय स्वतंत्र फल भोगते समय परतंत्र) [1, 2]
ज्ञानावस्था (Knowledge State)
4.1. शरीर (Body)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: अंतिम और अंतिम के पहला परिवेश [1, 2]
कोष गठन: अन्नमय कोष, प्राणमय कोष [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: अनुभवों की परम्परता में व शरीर स्तर पर [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: भौतिक, रासायनिक क्रिया [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: बीजानुषंगी [1, 2]
4.2. भ्रमित जीवन (General/Deluded Consciousness)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: महत्वपूर्ण पूर्ण क्रियाशील, तृतीय अर्थ से अधिक क्रियाशील, द्वितीय अर्थ से अधिक क्रियाशील [1, 2]
कोष गठन: विज्ञानमय कोष, आनंदमय कोष, मनोमय कोष, प्राणमय कोष, अन्नमय कोष (तुप्त) [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: जीवन परमाणु में (संवेदना के आधार पर अनुकूलता व प्रतिकूलता अधिक स्पष्ट रूप में) [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: मानना, पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: जीवन क्रिया (जाति क्रम में) [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: संस्कारानुषंगी (कर्म करते समय स्वतंत्र फल भोगते समय परतंत्र) [1, 2]
4.3. जागृत जीवन (Awakened Life)
परिसिथीय अंशों की सक्रियता: निर्णय मूलक विधि से चारों परिवेश पूर्ण क्रियाशील [1, 2]
कोष गठन: विज्ञानमय कोष, आनंदमय कोष, मनोमय कोष, प्राणमय कोष, अन्नमय कोष तुप्त (पाँचों कोष तुप्त = उपकार विधि से जीना) [1, 2]
कोष गठन के प्रमाणित होने का स्तर: जागृत जीवन परमाणु में [1, 2]
पहचानना, निर्वाह करना: जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना [1, 2]
क्रियाओं का वर्गीकरण: जीवन क्रिया (जागृति और जागृति पूर्णता) [1, 2]
कर्म फल सिद्धान्त: संस्कार पूर्ण (कर्म करते समय स्वतंत्र फल भोगते समय स्वतंत्र) [1, 2]