Please enable JavaScript.
Coggle requires JavaScript to display documents.
(लोकपाल का विचार कैसे आया?, लोकपाल आंदोलन (2011)) - Coggle Diagram
- लोकपाल का विचार कैसे आया?
ओम्बुड्समैन प्रणाली (Scandinavian countries से प्रेरित) को भारत में लाने का विचार सबसे पहले 1960 के दशक में आया।
1966: Administrative Reforms Commission (ARC) ने "लोकपाल" (केंद्र स्तर पर) और "लोकायुक्त" (राज्य स्तर पर) की सिफारिश की।
-
-
1968 से 2011 तक: लोकपाल विधेयक कई बार (लगभग 8 बार) संसद में लाया गया, लेकिन हर बार या तो लोकसभा भंग हो गई या बिल अटक गया।
सबसे बड़ा कारण – राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और नेताओं का डर कि कहीं यह संस्था उनके ऊपर भी न कार्रवाई करे।
- भ्रष्टाचार और असंतोष की पृष्ठभूमि
-
अन्ना हज़ारे और उनके साथियों (अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण आदि) ने “इंडिया अगेंस्ट करप्शन” नामक अभियान चलाया।
मुख्य माँग: एक मज़बूत और स्वतंत्र लोकपाल कानून बने, जिसमें प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, नौकरशाह सब लोकपाल के दायरे में आएं।
-
-
-
-
-
2013 में संसद ने ‘लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013’ पारित किया।
-
-
- लोकपाल की नियुक्ति और स्थिति
-
लोकपाल को उच्च स्तरीय लोक सेवकों, मंत्रियों और सांसदों के भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने का अधिकार मिला।
- आंदोलन के कारण (संक्षेप में)
-
-
पारंपरिक संस्थाओं (CBI, CVC) पर जनता का भरोसा कम होना।
-
-
-